Constitution (अनुच्छेद 20) – अधिकार, संरक्षण और महत्वपूर्ण बिंदु

Article 20 of Indian Constitution (अनुच्छेद 20) – भारतीय संविधान.

“भारतीय संविधान का अनुच्छेद 20 (Article 20 of Indian Constitution) एक महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार है, जो किसी भी व्यक्ति को अपराध और सज़ा (criminal cases) से जुड़ी गलत या अनुचित कार्यवाही से बचाता है। यह अनुच्छेद सुनिश्चित करता है कि किसी भी नागरिक को कानून के अनुसार उचित प्रक्रिया (due process) और न्यायिक सुरक्षा के … Read more

अनुच्छेद 19 ( वाक् स्वातंत्र्य आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण)

भारत का संविधान

अनुच्छेद 19 भारतीय नागरिकों को छह महत्वपूर्ण स्वतंत्रताएँ देता है। ये स्वतंत्रताएँ हर नागरिक के लिए बहुत जरूरी हैं, लेकिन इन पर कुछ उचित सीमाएँ भी लगाई जा सकती हैं। अनुच्छेद 19(1) — हर भारतीय नागरिक को मिलने वाली 6 स्वतंत्रताएँ (क) वाक्-स्वातंत्र्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हर व्यक्ति को अपनी बात बोलने, लिखने, व्यक्त … Read more

अनुच्छेद 18 (उपाधियों का अंत)

भारत का संविधान

अनुच्छेद 19 के अनुसार भारत का संविधान नागरिकों में समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए उपाधियों के दुरुपयोग को रोकता है। अनुच्छेद 18 यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी व्यक्ति किसी ऐसी उपाधि का उपयोग या स्वीकार न करे, जो असमानता को बढ़ावा दे या विशेष वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हो। … Read more

अनुच्छेद 17 ( अस्पृश्यता का अंत )

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अनुच्छेद 17 के अनुसार “अस्पृश्यता” का अंत किया जाएगा और इसका किसी भी रूप में आचरण निषिद्ध किया जाएगा। “अस्पृश्यता” के उपबंधों का कोई भी उल्लंघन एक अपराध होगा जो विधि के अनुसार दंडनीय होगा। आसान भाषा में अर्थ (Simple Explanation)अनुच्छेद 17 कहता है कि: उदाहरण (Examples) उदाहरण 1 – अगर कोई व्यक्ति किसी SC … Read more

अनुच्छेद 16 ( लोक नियोजन के विषय में अवसर की संता)

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अनुच्छेद 16 कहता है कि — 👉 भारत में सरकारी नौकरी, सरकारी पद, भर्ती और प्रमोशन में हर नागरिक को समान अवसर मिलेगा। 👉 किसी को धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान, निवास, मूलवंश के आधार पर नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता। आज आप पढ़ेंगे – 1 अनुच्छेद 16 की व्याख्या 2 उदाहरण 3 FAQS … Read more

अनुच्छेद 15 — धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध

भारत का संविधान

  अनुच्छेद 15 कहता है कि राज्य किसी भी नागरिक के साथ केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी नीतियाँ और सार्वजनिक सेवाएँ किसी भी व्यक्ति या समूह के साथ इन कारणों से भेदभाव न करें। आज आप पढ़ेंगे: 1 अनुच्छेद … Read more

अनुच्छेद 14 (समता का अधिकार)

भारत का संविधान

 

अनुच्छेद 14

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 यह सुनिश्चित करता है कि सभी लोग कानून की नजर में बराबर हैं। राज्य (Government) किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, धर्म, भाषा, लिंग, क्षेत्र या किसी भी अन्य आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता।

अनुच्छेद 14 क्या कहता है?

अनुच्छेद 14 कहता है कि—

👉 राज्य भारत के किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता (Equality before Law) और
👉 कानून द्वारा समान संरक्षण (Equal Protection of Laws) से वंचित नहीं करेगा।

इसका मतलब

  • हर व्यक्ति पर वही कानून लागू होगा।
  • किसी के साथ पक्षपात या भेदभाव नहीं होगा।
  • अगर दो लोग एक ही प्रकार का अपराध करें, तो सजा भी एक जैसी होगी।

उदाहरण 1 –

एक जैसी सजा – अगर A और B दोनों चोरी करते हैं, तो पुलिस और कोर्ट दोनों के साथ समान व्यवहार करेंगे। किसी को खास ट्रीटमेंट नहीं मिलेगा।

सरकारी नौकरी में समानता

ये सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने में हर नागरिक को समान अवसर मिलता है। कोई यह नहीं कह सकता कि फलाना धर्म या जाति के लिए नौकरी नहीं है।

उदाहरण 3 –

सड़क नियमों में समानता – अगर लाल बत्ती तोड़ना अपराध है, तो यह नियम मंत्री,आम आदमी, विद्यार्थी,व्यापारी सब पर समान रूप से लागू होगा।

FAQs:

1. क्या अनुच्छेद 14 सिर्फ भारतीय नागरिकों पर लागू होता है?

उत्तर – नहीं, अनुच्छेद 14 भारत में मौजूद हर व्यक्ति पर लागू होता है—नागरिक, विदेशी, या प्रवासी।

2. क्या सरकार सभी के लिए एक जैसे कानून बना सकती है?

उत्तर – हाँ, लेकिन कुछ परिस्थितियों में राज्य उचित वर्गीकरण (reasonable classification) कर सकती है, जैसे—

महिलाओं के लिए सुरक्षित नियम

बच्चों के लिए विशेष कानून

यह भेदभाव नहीं बल्कि सुरक्षा के लिए खास व्यवस्था है। 

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अनुच्छेद 12 (परिभाषा) एवं अनुच्छेद 13 ( मूल अधिकारों से असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाली विधियां)

भारत का संविधान

भाग 1 और भाग 2 में आपने भारत के संघ और नागरिकता से जुड़े बुनियादी सिद्धांत पढ़े। ये दोनों भाग भारत की संरचना और नागरिकता की नींव रखते हैं।अब हम प्रवेश कर रहे हैं भाग 3 (मूल अधिकार) में, जो भारतीय संविधान का सबसे महत्वपूर्ण भाग माना जाता है।यहीं से नागरिकों को मिलने वाले मौलिक … Read more

अनुच्छेद 11 ( संसद द्वारा नागरिकता के अधिकार का विधि द्वारा विनियमन किया जाना )

भारत का संविधान

  भारत के संविधान का अनुच्छेद 11 नागरिकता से संबंधित प्रावधानों को और आगे स्पष्ट करता है। यह अनुच्छेद यह बताता है कि भारत की संसद नागरिकता से जुड़े सभी मामलों पर कानून बनाने की पूरी शक्ति रखती है—चाहे वह नागरिकता का प्रदान करना हो, छीनना हो, रखना हो, या नागरिकता के अधिकारों में बदलाव … Read more

अनुच्छेद 10 ( नागरिकता के अधिकारों का बना रहना )

भारत का संविधान

अनुच्छेद 10 कहता है कि संविधान का अनुच्छेद 10 यह सुनिश्चित करता है कि जो व्यक्ति संविधान लागू होने से पहले भारत का नागरिक था या संविधान के लागू होने के बाद नागरिक बन गया है, वह तब तक भारत का नागरिक बना रहेगा, जब तक संसद किसी कानून के माध्यम से उसकी नागरिकता में कोई बदलाव न करे।

साधारण शब्दों में—👉 अगर आप भारत के नागरिक हैं, तो केवल संसद द्वारा बनाए गए कानून ही आपकी नागरिकता में बदलाव कर सकते हैं।

अनुच्छेद 10 को आसान भाषा में समझें

अनुच्छेद 10 का मतलब है कि भारत की नागरिकता “अपने-आप” खत्म नहीं हो जाती।नागरिकता में बदलाव या समाप्ति केवल संसद द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार ही हो सकती है, जैसे—नागरिकता अधिनियम 1955 नागरिकता संशोधन कानून  आदि के तहत। इससे नागरिकों को एक कानूनी सुरक्षा मिलती है कि उनका नागरिक होने का दर्जा स्थिर और सुरक्षित है।

अनुच्छेद 10 का उदाहरण

उदाहरण 1:

रमेश भारत का नागरिक है। वह 3 साल के लिए दुबई काम करने चला जाता है।➡️ अनुच्छेद 10 के अनुसार रमेश की भारतीय नागरिकता बनी रहेगी।वह सिर्फ विदेश जाने से नागरिकता नहीं खो देता।

उदाहरण 2:

अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे देश की नागरिकता ले लेता है, तब भी उसकी भारतीय नागरिकता तब तक खत्म नहीं मानी जाएगी,➡️ जब तक भारत की संसद के कानून (जैसे—Citizenship Act) के अनुसार वह नागरिकता समाप्त न कर दी जाए।

अनुच्छेद 10 तब तक खत्म नहीं होती जब तक संसद किसी कानून के तहत समाप्त न करे।

FAQs :

1. क्या अनुच्छेद 10 के अनुसार भारतीय नागरिकता अपने-आप खत्म हो सकती है?

उत्तर – नहींअनुच्छेद 10 के अनुसार नागरिकता तब तक खत्म नहीं होती जब तक संसद किसी कानून के तहत समाप्त न करे।

2. क्या विदेश में रहने से भारतीय नागरिकता स है?

उत्तर – नहीं। विदेश में रहने या काम करने से नागरिकता खत्म नहीं होती। नागरिकता समाप्त तभी होती है जब व्यक्ति दूसरी नागरिकता ले ले और कानूनन प्रक्रिया पूरी हो।

3. क्या संसद नागरिकता के नियम बदल सकती है?

उत्तर – हाँ। अनुच्छेद 10 संसद को नागरिकता से जुड़े नियम बनाने, बदलने या समाप्त करने की शक्ति देता है।

अस्वीकरण (Disclaimer) –

इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह नहीं है। नागरिकता से संबंधित अंतिम निर्णय हमेशा भारत की संसद द्वारा बनाए गए कानूनों और सरकारी नियमों के आधार पर ही मान्य होंगे

 

1 भारतीय संविधान का परिचय कब लागू हुआ किसने लिखा और प्रस्तावना

2 अनुच्छेद 1 (भारत का आधिकारिक नाम क्या होगा )

अनुच्छेद 2 (नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना)

अनुच्छेद 3 (नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों सीमाओं और नाम में परिवर्तन)

अनुच्छेद 4 ( पहली अनुसूची और चौथी अनुसूची के संशोधन तथा अनुपूरक, अनुषांगिक और परिणामिक विषयों का उपबंध करने के लिए अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अधीन बनाई गई विधियां)

अनुच्छेद 5 ( नागरिकता से संबंधित)

अनुच्छेद 6 ( पाकिस्तान से भारत को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्यक्तियों को नागरिकता)

अनुच्छेद 7 ( पाकिस्तान को प्रव्रजन करने वाले कुछ व्यक्तियों को नागरिकता का अधिकार )

अनुच्छेद 8 (भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार)

अनुच्छेद 9 (विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित करने वाले व्यक्तियों का नागरिक ना होना)