
शिकायत निवारण समिति (Grievance Redressal Committee) अद्योगिक संबंध कोड 2020 में नियोक्ता(कंपनी) और कामगार के बीच सेक्शन 4 द्वारा गठित समिति है,जो शिकायतों की जानकारी,और निवारण करती है आइए जानते है अद्योगिक संबंध कोड में इससे संबंधित क्या नियम/कार्य/फायदे हैं।
1 नियम (Rules):
1.1 कब बनती है:ऐसे औद्योगिक प्रतिष्ठानों में जहाँ 20 या अधिक कर्मचारी कार्यरत हों।
1.2 गठन का तरीका:समान संख्या में नियोक्ता और श्रमिक प्रतिनिधि होंगे।अध्यक्ष का चयन वैकल्पिक/रोटेशनल आधार पर सालाना होगा।
1.3 सदस्यों की संख्या:समिति के सदस्य 10 से अधिक नहीं हो सकते।
1.4 महिला प्रतिनिधित्व:महिला श्रमिकों का उचित प्रतिनिधित्व अनिवार्य है और उनकी संख्या, महिला कर्मचारियों के अनुपात के अनुसार होनी चाहिए।
1.5 शिकायत कैसे दर्ज हो:श्रमिक को 1 वर्ष के भीतर शिकायत दर्ज करनी होगी।
1.6 समयसीमा में निर्णय:समिति को 30 दिन के भीतर कार्यवाही पूरी करनी होगी।
1.7 निर्णय कैसे होगा:निर्णय बहुमत के आधार पर होगा। यदि बहुमत नहीं बनता, तो माना जाएगा कि कोई निर्णय नहीं हुआ।
1.8 यदि निर्णय से असंतोष हो तो:श्रमिक 60 दिन के भीतर ट्रेड यूनियन या मध्यस्थ संस्था के माध्यम से उच्च स्तर पर शिकायत कर सकता है।
1.9 व्यक्तिगत सेवा संबंधी विवाद:किसी कर्मचारी की सेवा समाप्ति, बर्खास्तगी, छंटनी से जुड़ा विवाद औद्योगिक विवाद माना जाएगा, भले ही यूनियन शामिल न हो।
1.10 ट्रिब्यूनल में अपील:यदि 45 दिन बीतने के बाद भी सरकार के समक्ष मध्यस्थता की कोशिश की जाए तो ट्रिब्यूनल में अपील की जा सकती है।
1.11 साल की समयसीमा:सेवा समाप्ति या अन्य मामलों में, कर्मचारी 2 वर्षों के भीतर ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता है।
2 कार्य (Functions):
2.1 व्यक्तिगत शिकायतों का समाधान।
2.2 भेदभाव, उत्पीड़न, गलत आरोप, अनुचित निलंबन जैसी शिकायतों पर सुनवाई।
2.3 निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध निर्णय देना।
2.4 कार्रवाई को लिखित और रिकॉर्ड में रखना।
3 फायदे (Benefits):
3.1 श्रमिकों की समस्याओं को सुनने का अधिकारिक मंच।
3.2 तेज और न्यायसंगत समाधान।
3.3 कानूनी प्रक्रियाओं का बोझ कम होता है।
3.4 नियोक्ता और श्रमिकों के बीच संवाद को बढ़ावा।
3.5 शोषण, पक्षपात और भेदभाव से सुरक्षा।
3.6 महिला श्रमिकों के लिए समान अधिकार और प्रतिनिधित्व।
अस्वीकरण:
यह लेख औद्योगिक संबंध कोड 2020 पर आधारित है जिसे आपको आसान भाषा में समझाने का प्रयास किया गया है। जिससे Employee और Employeer दोनों को अपने अधिकार, दायरों की जानकारी रहे,साथ ही जागरूकता बनी रहे।
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